how to learn children in school

 बच्चों को स्कूल मे एक अच्छे इंसान बनकर पढ़ाना चाहिए 

अच्छे इंसान मतलब जिसके अंदर मानवीय भावना हो करुणा हो दया हो , समनता की भावना हो 

जिससे बच्चा भी इन मानवीय मूल्यों को सिख सके , हम बच्चे को जीतने अच्छे मूल्यों के साथ पढ़ाएंगे 

बच्चा उतने हि ज्यादा मूल्यों को सिख पाएगा 

बच्चा पहले अपने माता के मूल्यों को ज्यादा स्वीकार करता है 

जब वह स्कूल मे जाता है तब वह सबसे अच्छे गुरु के गुण अपने अंदर धारण करने लग जाता है 

और यदि स्कूल मे उसको गुरु के अंदर हिंसा दिखी या फिर घमंड दिखा तो वह अपने अंदर एक रुखपन ले आता है 

इसलिए बच्चों को पढ़ते समय खुद के व्यवहार को अच्छे से मैनेज करना चाहिए 

गुस्सा उतना हि होना चाहिए जितना बच्चे को गलती का अहसास करवाए 

ना की उसके साथ बर्बरता हो 

एक शिक्षक के गुण 

दया भावना :- एक शिक्षक के अंदर यह गुण होना बहुत जरूरी है 

जब शिक्षक मे दया भावना होगी तब वह बच्चे के साथ गलती करने पर बर्बरता नहीं अपनी समझदारी दिखाएगा 

एक शिक्षक का समझदार होना बहुत जरूरी है 

दया भावना से बच्चों को सही गलत का फरक सीखना चाहिए 

मान लो एक बच्चे ने शिक्षक के हि किसी सम्मान की चोरी कर ली 

शिक्षक को पता चल गया की इस बच्चे ने चोरी की है 

तब शिक्षक को बस उसको महसूस करवाना है यह गलत बात है 

उसके लिए वह उस समान को लेकर उससे पुच सकता है तुम्हें यह क्यों चाहिए 

तब बच्चा सायद जवाव ना दे 

लेकिन उसे उस टाइम किसी से हल्का सा महसूस करवा देना चाहिए अपनी बातों से की चोरी करना गलत है उसके साथ मारपीट नहीं करनी चाइए 

उसे फिर यह बोलना चाहिए की तुम्हें यह चाहिए तो त्ु मुझसे पूछकर लो 

बच्चा जब पूछे की क्या आप हमे दे सकते है 

तब अगर वह वस्तु बच्चे के काम या सकती है तब तो बड़ा दिल रख कर दे देना चाहिए 

और नहीं दे सकते तब उसे प्यार से नहीं देने का रीज़न बताना चाहिए 

इससे बच्चा दया भावना और परिस्थितों को समझना और खुद को मैनेज करना सीखेगा 

करुणा कि भावना :- शिक्षक के अंदर करुणा की भावना होनी चाहिए 

जब बच्चा किसी परेशानी मे गलती करे तब उसे बिना मतलब डटना नहीं चाहिए 

बल्कि उसकी परेशानी को समझना चाहिए 

बिना करुणा के आप बच्चे को कभी नहीं समझ पाओगे 

मा के अंदर करुणा और ममता की भावना होती है इसलिए बच्चा मा से बहुत अधिक प्यार करता है 

और अपने मन की बात बताता है 

उसी तरह टीचर के अंदर भी करुणा की भावना होनी चाहिए 

समानता के गुण :-एक शिक्षक को हर बच्चे क समानता कि नजर से देखना चाहिए 

किसी भी बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए 

कुओकी जब बच्चे के साथ भेदभाव होता तब उसके अंदर एक हिन भावना आने लग जाती है 

                                     और वह सोचता है मै चाहे कितना भी अच्छा करू टीचर मुझे सयाबासी नहीं देगा 
और यह सोच कर वह अपने परफॉरमेंस को गिरा देता है 

उसकी यह भावना भविष्य मे भी उसको एक रुखपन दे जाती है 

जिससे लाइफ मे एक अच्छा आउट पूत नहीं दे पाता है 

इसलिए हर बच्चे को समान नजर से और समानता ओर बिना पक्ष पात के उसे उसके कार्य कि सहरना मिलनी चाहिए 

टीचिंग एक कला होनी चाहिए : शिक्षक को एक व्यवसाय के रूप मे नहीं बल्कि एक कला के रूप मे जीना चाहिए 

हम देखते है की आज कल बहुत से लोग पढ़ते तो है लेकिन वह सिर्फ पैसों के लिए जबकि

 टीचिंग एक कला है जब तक आप इस कला को नहीं जिओगे तब तक आप के पढ़ाने के

 तरीके से बच्चे कुश नहीं हो पाएंगे 

इसलिए टीचिंग को कला के रूप मे समझो और उसे जिओ ओर बच्चों को भी अच्छा जीवन जीने कि कला सिखाओ 

उसके लिए आप यह बुक पढ़ सकते हो 

एक टीचर को स्वास्थ्य ओर फॉर्मल रहना चाहिए :-

क्योंकि  बच्चे अपने शिक्षक से ज्यादा प्रभावित रहते है 

अगर टीचर स्वास्थ्य और अपने रहन सहन को शालीनता के साथ बच्चे सामने रहता है 

तब बच्चे भी प्रेरित होकर शालीनता के साथ रहने कि कोसिस करते है 

इसलिए टीचर को अपने शरीर और कपड़ों पर विशेष ध्यान देना चाइए 

जिससे बच्चे भी शालीन रहना शिखे 

टीचर कि पर्सनैलिटी बच्चों को shidhe प्रभावित करती है 

इसलिए पढ़ाने के साथ साथ टीचर के अंदर मानवीय मूल्य ओर सभ्य रहन सहन भी होना चाहिए 

अगर मेरे विचार अच्छे लगे है तो :-एक कॉफी हो जाए



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