क्या इंडिया मे प्राइवेट स्कूले बंद हो सकती है

 नहीं , क्यों बंद नहीं हो सकती 

क्योंकि जब तक नीति निर्माताओ के बच्चे प्राइवेट स्कूल मे जाना बंद नहीं करेंगे तब तक सरकरी स्कूल मे सुधार नहीं होगा 

सुधार नहीं होने पर नोकरी पैसे वाले लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल मे हि भेजेंगे 

हमारे यहा जो लोग नीतीया बनाते है वही नीतिया उन लोगों पर लागू नहीं होती यानि की वो खुद इसकी पालना नहीं करते है 

बात कड़वी लग सकती है लेकिन अपने आस पास आप इस चीज का आभास कर सकते है 

प्राइवेट स्कूल बिजनस कैसे बन गई :-

इसको सिम्पल शब्दों मे कहू तो :- सरकरी टीचर की कमियों की वजह से क्योंकि  जो जो कमिया सरकारी स्कूल मे

 रही उन कमियों का फायदा उठाकर प्राइवेट स्कूल आगे निकल गई 

सरकार का स्कूलों पर सही ध्यान न देना और अपनी कमिया ना सुधार पाने की वजह से सरकारी सकूले पीछे रह गई 

जो कमियाँ सरकार को सुधारणी थी उन कमियों को निजी लोगों ने सुधरने की कोसिस की 

जब इन कमियों के सुधार से उन्हे मुनाफा होने लगा तब उन्होंने इसको दायत्व नहीं बल्कि बिजनस बना लिया 

आज भी आप देख लो मूल भूत सुविधा मे प्राइवेट सकूले अच्छी सुविधा दे रही है 

टेक्नॉलजी के दौर मे प्राइवेट स्कूल टेक्नॉलजी को लागू कर रही है 

लेकिन सरकारी स्कूल मे बजट तो बन जाता है लेकिन लागू नहीं हो पाता है 

प्राइवेट स्कूले क्यों जरूरी है हमारे देश मे :-

क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है 

इसलिए इतना बजट सरकर स्कूल को देती है उतने बजट मे सभी फ्री मे नहीं पढ़ सकते है 

इसलिए प्राइवेट स्कूल जरूरी बन जाती है 

जहा नोकरी पैसे वाले लोग बच्चों को भेजे 
और सरकारी स्कूल मे कम से कम वो बच्चे पढ़ पाए जिनके पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं है 

क्या शिक्षा सभी के लिए समान हो पाएगी हमारे देश मे :-

हमारे देश मे शिक्षा का स्तर समान नहीं है 

क्योंकि सरकारी स्कूल के स्तर से थोड़ी ऊपर चल रही है प्राइवेट स्कूल 

आखिर शिक्षा का स्तर समान कैसे करे 

उसके लिए हमे शिक्षा के क्षेत्र मे बजट को बढ़ाने की जरूरत है 

और टीचर ट्रैनिंग और उनके काम को सही तरीके से मैनेज करने की जरूरत है 

सरकार को टीचर को हर तरह के काम नहीं देने चाहिए 
उनसे सर्वे करवाना कभी चुनावी ड्यूटी लगाना 

सरकार हर चीज मेपैसे बचाने की तो सोच लेती है 

लेकिन बच्चों के समय के बारे मे नहीं सोचती है 

क्योंकि टीचर जब स्कूल मे नहीं रहता है इधर उधर सर्वे मे लगा रहता है तब बच्चों के स्कूल डेज़ कम होते है 

बच्चे सिख नहीं पाते 

आखिर सरकार सर्वे और चुनावी ड्यूटी के लिए वॉलेनटेर भी तो रख सकती है 

freelancer 
उनको सर्वे के अकॉर्डिंग हायर करो और पैसे दो 

मुद्दा जवाव दही का आ जाता है तो उसके लिए रेटिंग सिस्टम रखो और उनको अनलाइन रखो 

जिस भी बंदे ने अच्छा काम किया है उसको उसके अनुशार रेटिंग दे दो 

और कंपनी को निर्देश दे दो की पहले आप रेटिंग चेक करो फिर जॉब दो 

इससे वह इंसान जवाव देह बन जाएगा 

बच्चों के भविष्य के निर्माताओ को समान दो लेकिन जब बो अपनी ड्यूटी सही से नहीं करे तब उनको दंड दो 

idfc first bank casback secure card 
earn 5% case back on your spends 
this is the affilite link 

Comments

Popular posts from this blog

MENTAL HEALTH IS VERY IMPORTANT : STUDENT

181 पर संपर्क करने से क्या होता है